शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

मैं हनुमान नहीं हूं

मैं हनुमान नहीं हूं

जो अपना सीना चीर के दिखलाऊं

कि मेरे सीने में राम बसते हैं

क्योंकि इस कलयुग में हर जगह रावण पूजे जाते हैं

भले हर घर-मंदिर में राम बसते हैं

मैं हनुमान नहीं हूं जो अपनी पूंछ में आग लगा लंका को जलाऊं


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